वरिष्ठ संवाददाता, अगस्त 29 -- वंदे भारत जैसी सेमी हाईस्पीड ट्रेनों को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाने की तैयारी के बीच रेलवे अब पटरियों के नीचे छिपी खामियों का भी पता लगाएगा। इसके लिए उत्तर मध्य रेलवे ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) से ट्रैक की अंदरूनी स्थिति की जांच कराने के लिए 26.91 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया है। जीपीआर तकनीक पटरियों का डिजिटल 'एक्स-रे' करेगी। इसमें ट्रैक के नीचे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें भेजकर बैलास्ट बेड और जमीन की विभिन्न परतों की स्थिति का पता लगाया जाएगा। खास बात यह है कि जांच के लिए पटरियों की गिट्टी हटाने या बड़े पैमाने पर खुदाई करने की जरूरत नहीं होगी। रडार की मदद से ट्रैक के नीचे पानी जमा होने, गिट्टी में मिट्टी और महीन कण भरने, बैलास्ट के खराब होने तथा जमीन की निचली...