विधि संवाददाता, जून 8 -- UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने मानसिक रूप से अस्वस्थ नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता का अवांछित गर्भ समाप्त कराने से जुड़े मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। साथ ही उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य, पुलिस और बाल संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी उठाए हैं। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा कि यदि कानून के बावजूद पीड़ित को उसका वैधानिक अधिकार न मिल सके, तो ऐसी व्यवस्था कानून को व्यवहार में निष्प्रभावी बना देती है। दरअसल, मेरठ की 17 साल की मानसिक रूप से अस्वस्थ नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की देखभाल उसके नाना कर रहे थे। नाबालिग लगभग 22 सप्ताह की गर्भवती पाई गई। पीड़िता ने अपने नाना को दुष्कर्म की जानकारी दी। जिसके बाद 11 जून साल 2023 को एफआईआर दर्ज हुई। मेडिकल जांच में 22 सप्ताह 6 दिन का गर्भ पाया गया। नाना ने पहल...