रेत के टीलों में सिमट रही गोमती, बढ़ा किसानों और जलीय जीवन पर संकट
गाजीपुर, मई 17 -- खानपुर, हिन्दुस्तान संवाद। पूर्वांचल की जीवनदायिनी कही जाने वाली गोमती नदी इन दिनों अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। तेज गर्मी, लगातार गिरते भूजल स्तर और बढ़ते प्रदूषण के कारण नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। हालत यह है कि कई स्थानों पर नदी की धारा सिकुड़कर नाले जैसी दिखाई देने लगी है, जबकि बीच धारा में रेत के बड़े-बड़े टीले उभर आए हैं। कहीं पानी घाटों से दूर चला गया है तो कहीं नदी का तल सूखकर मैदान जैसा नजर आने लगा है। गोमती नदी की बिगड़ती स्थिति का असर तटवर्ती गांवों में साफ दिखाई देने लगा है। सिधौना, गौरी, गोरखा, तेतारपुर, गौरहाट और बहुरा समेत दर्जनों गांवों के किसान सिंचाई संकट से जूझ रहे हैं। पहले जहां किसान आसानी से नदी के पानी से खेतों की सिंचाई कर लेते थे, वहीं अब उन्हें निजी पंप और अन्य संसाधनों का सहारा लेना पड़...
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