गंगापार, अप्रैल 23 -- कस्बे के सूजी चौक स्थित महफ़िल बुधवार की रात रूहानी रंग में सराबोर रही, फर्रुखाबाद से आए शायर शकील आरफी ने दिलकश अंदाज़ और तरन्नुम भरी आवाज़ में अशआर "दुनिया के सब यज़ीद इसी ग़म में मर गए, सर मिल गया हुसैन का, बैअत नहीं मिली..." कलाम जैसे ही फिज़ा में गूंजे, पूरा माहौल अकीदत और जज़्बात से भर उठा। शकील आरफी ने एक के बाद एक उम्दा कलाम पेश कर शमां बांध दिया। "वो जब चाहे मुश्किल को आसान कर दे, मंगतों को सुल्तान कर दे." जैसे अशआर पर हाजरीन महफ़िल ने खूब दाद दी। जो देर रात तक रौनक बिखेरती रही। शायर गुलाम मिर्जापुरी ने भी अपनी नातिया पेशकश "या नबी दर पर कब बुलाओगे, पूरी कब होगी आरज़ू मेरी." से लोगों के दिलों को छू लिया। वहीं अशद राईन और हाफिज मुस्ताक़ ने भी अपने कलाम से महफ़िल में चार चांद लगाए। निजामत सूफी खाने आलम नक्शबंद...
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