कानपुर, अगस्त 6 -- कानपुर, संवाददाता। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कार्गो शिप पर हुए यूक्रेन के ड्रोन हमले में मृत चीफ मर्चेंट नेवी अफसर सागर गुप्ता का शव 18 दिन बाद रूस से यहां घर पहुंचा। ताबूत से लिपटकर पत्नी शालू रो पड़ी। वह अपनी सुध-बुध खो बैठीं। यह नजारा देख हर आंख नम हो गई। घटना की सूचना के बाद से ही बेसुध चली आ रही बूढ़ी मां की आंखें छलक गईं। बोलीं-'मुझे मेरे बेटे की शक्ल दिखा दो'। पिता की तरह पाल पोसकर बड़ा करने वाले बड़े भाई मनीष की आंखें पथरा गईं थीं। साढ़े चार साल की बेटी गौरी के कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। वह चिल्लाती रही-'पापा कहां हैं, मुझे पापा से बात करा दो....पापा सो क्यों रहे हैं....उठो न पापा'। यह भी पढ़ें- रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए यूपी के सागर, शव से लिपट मां बोलीं- शक्ल तो दिखाओ, तड़प उठी पत्नी-बच्...