भागलपुर, सितम्बर 24 -- कहलगांव, निज प्रतिनिधि। सच्चे प्रेम में श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का विशेष महत्व होता है, जबकि सच्ची मित्रता में ऊंच-नीच, धन-दौलत और वैभव का कोई स्थान नहीं होता। प्रेम, त्याग और निःस्वार्थ भाव ही संबंधों को मजबूत बनाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के विवाह प्रसंग और कृष्ण-सुदामा की मित्रता से यही प्रेरणा मिलती है। उक्त बातें वृंदावन से पधारीं कथावाचिका प्रीति किशोरी ने बुधवार को कहलगांव अनुमंडल के सनोखर बाजार स्थित काली माता मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहीं। भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि माता रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और अटूट श्रद्धा रखती थीं। उनकी भक्ति ए...