अयोध्या, मार्च 6 -- बीकापुर। विकासखंड क्षेत्र के पूरे गुलजार शिवतर में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथावाचक पं. दीपेश्वर ने माता रुक्मिणी और भगवान श्रीकृष्ण के विवाह का रोचक प्रसंग सुनाया। कथावाचक ने बताया कि विदर्भ के राजा भीष्मक के घर माता रुक्मिणी का जन्म हुआ था। बाल्यकाल से ही उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को अपने पति के रूप में स्वीकार कर लिया था,लेकिन उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से करने का निश्चय कर लिया था। यह सुनकर रुक्मिणी अत्यंत व्यथित हो गईं। सुदेव नामक ब्राह्मण के माध्यम से रुक्मिणी ने सात श्लोकों में लिखकर अपना संदेश भगवान श्रीकृष्ण तक पहुंचाया। विवाह का प्रसंग सुनने वाले श्रोता भाव विभोर नजर आये
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