गोरखपुर, अप्रैल 10 -- गोरखपुर, मुख्य संवाददाता अब रीसस मकाक बंदरों (लाल मुंह वाले बंदर) को पकड़ने के लिए वन विभाग की अनुमति नहीं लेनी होगी। नगर निगम, नगर पंचायत, पालिकाएं और ग्राम पंचायतें सीधे अपने स्तर पर विशेषज्ञों की मदद से बंदरों को पकड़वा सकेंगी।इलाहाबाद हाईकोर्ट चल रहे विनीत शर्मा व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के अंतरिम निर्णय के अनुपालन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन अनुभाग के प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी ने कार्य योजना जारी कर जिलाधिकारियों को अनुपालन के निर्देश दिए हैं।नई व्यवस्था के अनुसार, बंदरों (रीसस मकाक) को वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत पकड़ने की छूट दी गई है। इसे ध्यान में रखते हुए शासन स्तर बंदरों के कारण उत्पन्न होने वाले संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए अंतरित कार्य योजना बनाई गई है। बंदरों को ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.