नई दिल्ली, दिसम्बर 13 -- आज के समय में नौकरीपेशा लोगों की एक आम समस्या है, ऑफिस से छुट्टी लेना। प्राइवेट जॉब में तो यह और भी मुश्किल हो जाता है। कई बार सच बोलकर छुट्टी मांगने पर नहीं मिलती, लेकिन अगर रिश्तेदार की मौत या किसी गंभीर बीमारी का बहाना बनाने से तुरंत मंजूरी मिल जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह झूठ बोलना सही है या गलत? क्या यह पाप है? वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद जी महाराज ने अपने एक सत्संग में इस सवाल का जवाब दिया है।भक्त का सवाल और महाराज जी की हंसी भरी प्रतिक्रिया प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में एक भक्त ने कहा - 'महाराज जी, मैं एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूं। जरूरी काम के लिए सच बोलकर छुट्टी मांगता हूं तो नहीं मिलती, लेकिन अगर दादी, नानी, फूफा या किसी रिश्तेदार की मौत का बहाना बनाता हूं, तो तुरंत...
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