बांदा, अप्रैल 8 -- बांदा। पुलिस के अधिकारी व जवान जर्जर भवनों में रह रहे लोगों को खाली करने और सचेत करने का काम करते हैं, पर खुद दशक भर पहले रिजेक्ट हो चुके भवनों में बैठने व रहने को मजबूर हैं। जर्जर भवन ढहने से हो रही जनहानि के बाद भी जिम्मेदार सबक नहीं ले रहे हैं। जाबांजों की जिंदगी डर के साए में कटती है। उनका परिवार व बच्चे भी इन्हीं जर्जर कालोनियों में रहने को बाध्य है। आपके अपने हिन्दुस्तान अखबार ने बुधवार को मंडल मुख्यालय में ऐसे कई सरकारी भवनों की पड़ताल की, जहां एक पल रुकने में भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बिजली विभाग का प्रवर्तन दल कार्यालय, पुलिस क्लब और पुलिस कर्मियों की आवासीय कालोनियां बेहद जर्जर हैं और यह कभी भी ढहकर बड़े हादसे का सब बन सकती हैं। पुलिस के जाबांजों ने कहा कि बहुत से सिपाही डर के मारे किराए के कमरों में रहते है...