पूर्णिया, अप्रैल 29 -- जलालगढ़, एक संवाददाता। जलालगढ़ प्रखंड के महियारपुर गांव में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) की ओर से आयोजित जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को रासायनिक खेती के विकल्पों पर विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. अतिश सागर और डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि लगातार बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से खेती की लागत तो बढ़ रही है, लेकिन जमीन की उत्पादकता घटती जा रही है। ऐसे में प्राकृतिक और जैविक खेती किसानों के लिए एक व्यवहारिक विकल्प बनकर उभर रही है। वैज्ञानिकों ने बताया कि पारंपरिक रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि लंबे समय में उत्पादन स्थिर और लाभकारी भी रहता है। यह भी पढ़ें- रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करें किसान, बढ़ेगी...