राष्ट्र रक्षा यज्ञ शृंखला का 100वां यज्ञ संपन्न
मेरठ, मई 25 -- आर्य समाज बुढ़ाना गेट मंदिर में राष्ट्र रक्षा यज्ञ शृंखला में रविवार को 100वां यज्ञ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। यजमान विजय आर्य रहे। वक्ता प्रभात आर्य ने यज्ञ के स्वरूप और विभिन्न प्रकारों पर प्रकाश डाला। कहा कि महर्षि दयानंद ने पंच महायज्ञों का उल्लेख किया है, किंतु इसके अतिरिक्त संपूर्ण जीवन भी यज्ञमय होना चाहिए। व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक शुभ कर्म, उपकार और दान भी यज्ञ का ही एक स्वरूप हैं। कहा कि यज्ञ करते समय धुआं नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।सुशील बंसल ने कहा कि व्यक्ति यदि अपने सभी कार्य स्वच्छ मन और निष्कपट भावना से करेगा तो उसका जीवन आनंद और उल्लास से भर जाएगा। छोड़ देवे छल कपट को, मानसिक बल दीजिए का उल्लेख किया। संचालन अमित कांत ने किया। मौके पर संजय गुप्ता, सोम ...
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