नई दिल्ली, जून 11 -- सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसों में जान गंवाने वाली घरेलू महिलाओं के योगदान को सम्मान देते हुए एक ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील फैसला सुनाया है। अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत मिलने वाले मुआवजे में पत्नी की घरेलू देखभाल के नुकसान को एक बिल्कुल अलग और नया आधार माना है। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि गृहणियों के इस अमूल्य योगदान को केवल घरेलू काम नहीं कहा जा सकता, बल्कि वे देश के निर्माण में भूमिका निभाती हैं। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. के. सिंह की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, "एक गृहणी इंसान और राष्ट्र दोनों के विकास में अपना अमूल्य योगदान देती है। हम उम्मीद और विश्वास करते हैं कि होममेकर शब्द को अब समाज में नेशन बिल्डर के रूप में पहचान और सम्मान मिलेगा।" अदालत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि एक मां, पत्नी या गृहणी द्वार...