नई दिल्ली, अगस्त 20 -- राष्ट्रगीत वंदे मातरम् पर छिड़ा विवाद दुखद और गैर-जरूरी है। काश! इस मामले में राजनेताओं में परस्पर सहमति बन जाती, तो अनावश्यक चर्चा को बल नहीं मिलता। इसमें कोई दोराय नहीं कि यह गीत हमारे स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत रहा है। पिछली सदी की शुरुआत से ही कांग्रेस के अधिवेशनों में भी इसे तीन दशक तक पूरा और निरंतर गाया जाता था। जब देश में सांप्रदायिक तनाव के हालात बनने और बढ़ने लगे, तब कांग्रेस के आला नेताओं ने साल 1937 में राष्ट्रगीत के दो पैरा को ही गाने का फैसला लिया था। आज भी शायद सियासी वजहों से कांग्रेस उसी फैसले पर चलना चाहती है, लेकिन ध्यान रहे, आज कांग्रेस को चुनौती देने के लिए भारतीय जनता पार्टी बहुत सशक्त स्थिति में है। आश्चर्य नहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के फैसले की तीखी...