आरा, अप्रैल 24 -- आरा, निज प्रतिनिधि। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' का काव्य संसार जागरण एवं क्रांति के स्वरों का उन्नायक है। उनकी कविता ने अतीत के मधुरिम गुणगान को विस्तृत करते हुए जीवन के आर्थिक, राजनीतिक शोषण एवं उत्पीड़न के विरोध में क्रांति का उद्घोष किया। दिनकर जनचेतना के गायक कवि हैं। उक्त बातें लोक चेतना मंच के तत्वावधान में दिनकर की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भोजपुर जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष व वीकेएसयू के सीनेटर प्रो. बलिराज ठाकुर ने कही। कवि समीक्षक जितेंद्र कुमार ने कहा कि दिनकर ओज और पौरुष के कवि हैं। ज्ञानपीठ प्राप्त काव्य नाटक 'उर्वशी' को उन्होंने कालजयी बताया। यह भी पढ़ें- मधेपुरा: राष्ट्रकवि दिनकर की कविताएं आज भी समाज, युवा और राष्ट्र की चेतना को रही हैं जागृत भोजपुरी विभागाध्यक्ष प...
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