ललितपुर, जनवरी 9 -- शासन की योजनाओं का लाभ जिन जरूरतमन्द व्यक्तियों तक पहुंचना चाहिए, वहां उनकी पहुंच जिम्मेदार नहीं बना पा रहे हैं। जानकारी का अभाव भी पात्र ग्रामीणों को इनसे दूर किए है। आकांक्षी ब्लाक मड़ावरा स्थित वनगुवां ग्राम पंचायत का मजरा पापड़ा और उल्दनाकलां ग्राम पंचायत का मजरा सौलदा इसका उदाहरण है। कर्नाटक में बंधक बनाकर रखे गए पापड़ा और सौलदा के 13 वयस्क, चार किशोर श्रमिकों के साथ 19 बच्चों को छुड़ाकर जनपद लाने के बाद अब अधिकारी इन स्थितियों के उत्पन्न होने के कारणों पर विस्तार से विचार कर रहे हैं। आदिवासी समुदाय के लोगों तक विभिन्न योजनाओं की पहुंच खंगाली जा रही है। राशनकार्ड, आधारकार्ड, मनरेगा जाबकार्ड और बैंक अकाउण्ट सहित बच्चों के लिए स्कूल आदि की मौजूदा स्थिति का पता लगाया जा रहा है। डाइट के सामने रैन बसेरा में ठहरे श्रमिकों म...
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