इटावा औरैया, मार्च 10 -- जसवंतनगर। कटेखेड़ा में चल रहे नौ दिवसीय रामकथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस राम विवाह व धनुष भंग का प्रसंग बड़े ही भावपूर्ण ढंग से सुनाया गया। कथा वाचक महंत गणेश दास ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रसंग का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति और मर्यादा का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि मिथिला नरेश जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर में शिव धनुष उठाने की शर्त रखी थी, जिसे बड़े-बड़े राजा-महाराजा भी नहीं उठा सके। तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने सहज भाव से शिव धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह धनुष भंग हो गया। यह दृश्य देखकर जनकपुरी में हर्ष का वातावरण छा गया और भगवान राम व माता सीता का विवाह बड़े ही धूमधाम से संपन्न हुआ।परीक्षित की भूमिका सुदामा देवी और जगदीश यादव ने निभाई। आयोजन की व...