इटावा औरैया, नवम्बर 26 -- इटावा। सेवा भारती के सेवा कार्यों के सहायतार्थ प्रदर्शनी पंडाल में हो रही रघुकुल शिरोमणि दशरथ नन्दन श्री राम कथा के विश्राम दिवस पर बोलते हुए आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि राम राज ही विश्व शांति का आधार है। यहां किसी का किसी से बैर नहीं रहता। सब समान होते हैं और अपने स्वधर्म पर चलते हुए सभी आपस में प्रेम करते हैं। इसीलिए भारत में सदैव से राम राज की संकल्पना की जाती है। इसे किसी धर्म विशेष से सीमित करना उचित नहीं है। बुधवार को अरण्य कांड के प्रसंगों की चर्चा करते हुए आचार्य ने जयंत के मान भंग की कथा सुनाई और जब उसके प्राण संकट में पड़े तो नारद के समझाने पर वह भगवान राम के पास गया और क्षमा मांगी। दयालु राम ने उसे क्षमा कर दिया। इसके बाद प्रभु राम सीता और लक्ष्मण के साथ अत्रि मुनि एवं माता अनुसुइया के आश्रम में आये ...
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