राम-भरत मिलाप प्रसंग सुन श्रद्धालु हुए भाव-विभोर
धनबाद, जून 15 -- चिटाही धाम स्थित श्री रामराज मंदिर में आयोजित भव्य श्रीराम कथा के छठे दिन रविवार को भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यह भी पढ़ें- वनवास की पीड़ा से रामराज्य की महिमा तक, कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालुकथा का जीवनदर्शन कथावाचिका गृषा शुक्ला ने कथा में पुत्र वियोग में राजा दशरथ का प्राण त्यागना, भरत द्वारा अयोध्या के राजगद्दी त्यागने तथा वनवास के दौरान राम-भरत मिलाप के अत्यंत भावुक और प्रसिद्ध प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। कथा सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथावाचिका ने कहा कि कर्म ही जीवन का आधार है और मनुष्य को अपने कर्मों का ही फल प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि पूर्व जन्मों और वर्तमान जीवन के कर्मों के अनुसार ही सुख-दुख की प्राप्ति होती है।राजा दशरथ का उदाहरण राजा दशरथ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि श...
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