औरंगाबाद, मार्च 26 -- नवरात्रि के अवसर पर ब्लॉक मोड़ स्थित शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित रामकथा के दौरान कथावाचक मनोहर जी महाराज ने कहा कि भगवान जब किसी जीवात्मा की व्यथा सुनते हैं तो वह कथा बन जाती है, अन्यथा जीव की व्यथा केवल व्यथा ही रह जाती है। उन्होंने अहिल्या उद्धार की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान राम के चरण रज के स्पर्श से गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का उद्धार हुआ था। उन्होंने बताया कि 84 लाख योनियों के गुणों को समाहित कर ब्रह्मा जी ने अहिल्या का निर्माण किया था, जो अत्यंत सुंदर, गुणवान और निर्दोष थीं। उनकी सुंदरता पर देवराज इंद्र मोहित हो गए थे और उन्हें भोग की वस्तु समझने लगे थे। ब्रह्मा की सभा में गौतम ऋषि सबसे अधिक तपस्वी और निर्दोष सिद्ध हुए, इसलिए ब्रह्मा ने अहिल्या को धरोहर के रूप में उनके पास रखा। बाद में निर्धारित समय पूरा होन...