हापुड़, जून 6 -- गंगा नगरी के श्री कृष्ण आश्रम में आयोजित राम कथा के सातवें दिन कथा वाचक अवधेश जी महाराज ने बताया जब जटायु नासिक के पंचवटी में रहते थे तब एक दिन आखेट के समय महाराज दशरथ से उनकी मुलाकात हुई और तभी से वे और दशरथ मित्र बन गए। वनवास के समय जब भगवान श्रीराम पंचवटी में पर्णकुटी बनाकर रहने लगे, तब पहली बार जटायु से उनका परिचय हुआ। भगवान श्रीराम अपने पिता के मित्र जटायु का सम्मान अपने पिता के समान ही करते थे। सत्यव्रत रखो, मौन व्रत रखो। इस अवसर पर दर्जनों श्रद्धालु मौजूद रहें।

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