वाराणसी, अक्टूबर 3 -- रामनगर, संवाददाता। श्रीराम अयोध्या के राजकुमार ही नहीं थे बल्कि लोगों के दिल में धड़कते थे,भावनाओं में बहते थे, नजरों में रहते थे। पिता के वचन को निभाना था, इसलिए राजपद का मोह त्यागने में एक पल नहीं लिया और चल पड़े वन की ओर। सीता ठहरीं अर्धागिनीं तो राजमहल में क्या करतीं। लक्ष्मण को प्रभु सेवा का इससे बेहतर अवसर कहां मिलता, वह भी साथ हो लिए। जब राम वन चले तो भींगी आंखे लिए सारी अयोध्या उनके पीछे वन की डगर पर चल पड़ी। यह भी पढ़ें- Varanasi News: दशरथ को मूर्छित देख छाया सन्नाटा राम का वनगमन रामलीला के नौवें दिन, शनिवार को लीला प्रेमी श्रीराम के वनगमन लीला के भावुक प्रसंगों का हिस्सा बने। श्रीराम के वन जाने की बात सुनकर सीता भी उनके साथ वन चलने का आग्रह करती हैं। श्रीराम तरह तरह से समझाते हुए कहते हैं कि अयोध्या में रह कर...