बलिया, मई 4 -- भरौली, हिन्दुस्तान संवाद। कोरंटाडीह (उजियार) में चल रहे हरिहरात्मक महायज्ञ में रविवार की रात आचार्य पौराणिक महाराज ने बताया कि रामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि मानव जीवन के मूल्यों और व्यवस्थाओं का जीवंत दर्पण है। इसमें दो जीवन पद्धतियों पहला दैवीय और दूसरा आसुरी का स्पष्ट वर्णन है। प्रभु श्रीराम और भरत दैवीय तथा रावण और लंका आसुरी प्रवृत्ति के प्रतीक हैं।उन्होंने गोस्वामी जी द्वारा रचित रामचरितमानस को मानवता के लिए सार्वकालिक, दिव्य और अलौकिक वरदान बताते हुए कहा कि इसका वास्तविक उद्देश्य राम के आदर्शो को अपने जीवन में धारण करना है। व्यक्ति अपने अंतर्मन में राम के चरित्र को स्थापित कर लेता है तो तब वह स्वयं एक चलता फिरता रामचरितमानस बन जाता है। यह भी पढ़ें- व्यवहार संहिता है राम चरित मानस: राजन महाराज महायज्ञ का...