मुंगेर, अप्रैल 22 -- ​मुंगेर, निज संवाददाता। सोमवार की रात अगर आप मुंगेर के सदर अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर गए थे, तो यकीन मानिए, आप केवल मरीज नहीं, बल्कि एक साहसी पर्यटक थे। हिंदुस्तान की टीम जब रात के सन्नाटे में 12 बजे अस्पताल का हाल जानने निकली, तो नजारा किसी हॉरर फिल्म के उस अस्पताल जैसा था जहां किरदार तो बहुत हैं, लेकिन रक्षक गायब थे। अस्पताल के प्रबंधन ने वर्क-लाइफ बैलेंस का ऐसा अनूठा उदाहरण पेश किया है कि दो डॉक्टरों के कंधों पर पूरे अस्पताल का बोझ डाल दिया गया। डॉ. रूपेश उस रात किसी मल्टीटास्किंग मशीन से कम नहीं लग रहे थे। यह भी पढ़ें- सदर अस्पताल के इमरजेंसी से गायब रहे डॉक्टर, दर्द से करती रही महिला उनके जिम्मे इमरजेंसी, प्रसव केंद्र और आईसीयू जैसे तीन अति-संवेदनशील विभाग थे। अब डॉक्टर साहब एक शरीर से तीन जगह कैसे मौजूद रहे...