चतरा, मई 4 -- सिमरिया निज प्रतिनिधि सिमरिया प्रखंड के गांवों में कभी शांति और सुरक्षा का पर्याय रहे चौकीदार आज अपनी मूल पहचान खोते जा रहे हैं। जिन चौकीदारों को कभी 'गांव का दारोगा' कहा जाता था, आज उनकी ड्यूटी कोलियरी के चलते सड़कों पर भारी वाहनों को रोकने नो-एंट्री तक सिमट कर रह गई है।

चौकीदारों की घटती भूमिका कभी गांव के हर घर की खबर रखने वाले और षड्यंत्रों की सूचना समय से पुलिस तक पहुंचाने वाले ये प्रहरी अब गांव से दूर हो गए हैं। गांव की हर छोटी-बड़ी घटना पर पहले पहुंचने वाले और रात में गांव की गलियों में गश्त लगाकर लोगों को सुरक्षा का अहसास दिलाने वाली उनकी बुलंद आवाज अब सुनाई नहीं देती। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले उग्रवादियों ने क ई चौकीदार की हत्या कर पुलिस तंत्र के कनेक्शन को काटने का काम किया। अपने पांव पसारने के लिए पहले लोगो ...