गोंडा, मार्च 11 -- गोण्डा, संवाददाता। मुबारक महीना रमजान के 21 रोजे मुकम्मल हो गए। आखिरी अशरे में बारगाहे इलाही में ज्यादा से ज्यादा सजदे और नमाज का एहतिमाम किया जा रहा है। आखिरी दस दिनों में लैलतुल कद्र की रात तलाशी जा रही। मुस्लिम समाज के लोग पूरी रात जगकर अल्लाह की इबादत कर रहे है। अहम रातों में रात भर नफिल नमाज का दौर चलता है। इसके साथ ही लोग कुरआन की तिलावत में जुटे है। तीसरे अशरे में मुस्लिम समुदाय के तमाम लोग मस्जिदों में एतकाफ में बैठकर दिन-रात अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। जबकि महिलाएं घर के किसी कोने में पर्दा लगाकर बैठती हैं। वे 10 दिन तक पाबंदी से रोजा रखते हैं। नमाज-कुरान पढ़कर अल्लाह की इबादत करते हैं, तारावीह पढ़ते हैं। यानी खुद को हर चीज से दूर कर सिर्फ अल्लाह की इबादत करने में जुट जाते है। रमजानुल मुबारक के तीसरे असरे की पांच...