नई दिल्ली, अप्रैल 26 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। कोरोना महामारी के बाद राज्यों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और उनकी अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है लेकिन उन पर कर्ज को बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। राज्य अपनी जरूरतों के लिए उच्च ब्याज दर पर कर्ज उठा रहे हैं। जबकि अधिकांश राज्यों में कर्ज प्रबंधन अभी तक सालाना आधार पर किया जा रहा है। हाल ही में राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों के राजस्व और राजकोषीय घाटे में कमी आई है लेकिन फिर भी कर्ज का दबाव बना हुआ है। क्योंकि राज्यों के पास कर्ज का बोझ कम करने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं है। रिपोर्ट में गोवा, उत्तराखंड, झारखंड, केरल और हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों के कर्ज का हवाला दिया गया है। गोवा में राज्य सकल घरेलू उत्पाद (एसजीडीपी...
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