नई दिल्ली, जनवरी 23 -- राजधानी जयपुर सहित पूरे राजस्थान में थायरॉइड विकार तेजी से एक गंभीर लेकिन अनदेखी स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहा है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं में इसका बढ़ता प्रचलन चिंता का विषय बन चुका है। सरकारी सर्वेक्षणों और वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, थायरॉइड अब केवल जीवनशैली से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डालने वाला "साइलेंट थ्रेट" बनती जा रही है। भारत सरकार द्वारा प्रकाशित राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के आंकड़े बताते हैं कि देश में स्व-रिपोर्टेड गोइटर या थायरॉइड विकार का प्रचलन 2.9% तक पहुंच गया है, जो NFHS-4 (2015-16) में 2.2% था। यह वृद्धि साफ संकेत देती है कि थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन अब भी बड़ी आबादी इसकी ग...
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