नई दिल्ली, अगस्त 30 -- नगर निगम चुनाव में टिकट की दौड़ अब उस मुकाम पर पहुंच गई है, जहां एक-एक मिनट और एक-एक दस्तावेज उम्मीदवार की किस्मत तय कर सकता है। भाजपा और कांग्रेस ने टिकट वितरण से पहले होने वाले संभावित विरोध, बगावत और विवाद को थामने के लिए इस बार नया दांव खेला है। दोनों दल प्रत्याशियों की अधिकृत सूची सार्वजनिक करने के बजाय सीधे रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) को सूची सौंपने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसका मतलब साफ है-पार्टी के टिकट का इंतजार कर रहे दावेदारों को आखिरी समय तक सिर्फ भरोसे के सहारे रहना पड़ सकता है, जबकि पार्टी का अंतिम फैसला सीधे चुनाव अधिकारी तक पहुंच जाएगा। ऐसे में नामांकन का अंतिम दिन टिकट के दावेदारों के लिए किसी सियासी परीक्षा से कम नहीं रहने वाला।सुबह से शुरू होगा इंतजार, आखिरी वक्त तक चलेगी लॉबिंग भाजपा और कांग्रेस के...