जयपुर, नवम्बर 13 -- राजस्थान सरकार ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव कर दिया है। अब प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और हॉस्पिटलों में पदस्थ प्रिंसिपल और अधीक्षक घर या क्लीनिक पर निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। यह फैसला डॉक्टरों की ड्यूटी, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इन पदों पर बैठे डॉक्टर यूनिट हैड या विभागाध्यक्ष (HOD) नहीं बन सकेंगे। यानी एक ही डॉक्टर अब एक साथ कई जिम्मेदारियों का बोझ नहीं उठाएगा। अब कोई भी डॉक्टर सीधे प्रिंसिपल नहीं बन सकेगा। इसके लिए सरकार ने अनुभव की अनिवार्यता तय की है। केवल वही डॉक्टर कॉलेज का प्रिंसिपल या कंट्रोलर बनाया जाएगा, जिसके पास अधीक्षक या अतिरिक्त प्रिंसिपल पद पर कम से कम 3 साल का अनुभव और विभागाध्यक्ष के ...
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