जयपुर, अगस्त 23 -- राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले का बिल्लीखेड़ा गाँव 21 अगस्त की सुबह नींद से नहीं, बल्कि कानों को चीर देने वाली चीखों से जागा। लोग घरों से बाहर भागे, लेकिन जब तक कोई समझ पाता, सब कुछ खत्म हो चुका था। गाँव के एक ही घर के आंगन में खून बह रहा था, दो लाशें पड़ी थीं और घायल बच्चे तड़प रहे थे। जिसने यह सब किया, वह कोई बाहरी नहीं, बल्कि उसी परिवार का सदस्य था-प्रेमचंद मीणा। 42 वर्षीय प्रेमचंद मीणा, जो कभी गाँव में शांत और सीधा माना जाता था, अचानक खूंखार हत्यारा कैसे बन गया? यह सवाल हर किसी के मन में है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि प्रेमचंद आर्थिक तंगी और पारिवारिक तानों से टूटा हुआ था। रोज़-रोज़ की फटकार, "कमाता नहीं, निकम्मा है", जैसे ताने उसके भीतर आग बनकर धधक रहे थे। "वो अक्सर गुमसुम रहता था। कई बार खेत में अकेला बैठा घंटों सो...
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