इटावा औरैया, मार्च 6 -- स्वर्णिम भारत की पुनर्स्थापना के लिए राजयोग के माध्यम से ज्ञान और ध्यान की महती आवश्यकता है। तभी मनुष्य के संस्कारों में परिवर्तन होकर सतयुगी संस्कारों का उदय होगा। यह विचार बीके गीता दीदी ने व्यक्त किए। ब्रह्माकुमारी द्वारा आयोजित दो दिवसीय ईश्वरीय कार्यक्रम सफल जीवन का आधार, गीता का सार एवं राजयोग के पहले दिन शुक्रवार को मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम के दौरान बीके अंजलि बहिन ने आत्म दर्शन और परमात्म दर्शन को विस्तार से समझाया। बीके अनीता बहिन ने कर्म दर्शन और सृष्टि चक्र के ज्ञान पर प्रकाश डाला। वहीं अकबरपुर से आईं बीके सीमा बहिन ने संस्था का परिचय दिया। बच्चों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ योगशक्ति बीके गीता दीदी, बीके अनीता दीद...
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