नई दिल्ली, अप्रैल 25 -- 24 अप्रैल 2026, आम आदमी पार्टी के इतिहास की जब भी बात होगी तो इस दिन को जरूर याद किया जाएगा। इसलिए नहीं कि इसके युवा चेहरे राघव चड्ढा ना पार्टी छोड़ दी, बल्कि इसलिए कि 14 साल कि अरविंद केजरीवाल के 14 साल पुराने दल में पहली बार इतनी बड़ी टूट हुई है। पार्टी का संसदीय दल टूट गया और बागी गुट ने एक तिहाई सदस्यों के साथ भाजपा में विलय कर लिया। हालांकि, 'आप' के लिए इस आंकड़े से भी बड़ा एक सदमा यह है कि जिसके हाथ में संगठन की कमान थी, उसने भी अचानक ही सबकुछ छोड़कर भाजपा में जाने का ऐलान कर दिया। आप की गतिविधियों और कामकाज पर नजर रखने वाले राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राघव चड्ढा या किसी अन्य सांसद के जाने के मुकाबले संदीप पाठक को लेकर पार्टी को सबसे ज्यादा बड़ा नुकसान हुआ है। 2022 में जब आम आदमी पार्टी ने पंजाब से हरभजन...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.