कोलकाता, मई 5 -- पश्चिम बंगाल की सत्ता पर 15 साल तक काबिज रहने के बाद ममता बनर्जी की ना सिर्फ सरकार चली गई, बल्कि लगातार दूसरे चुनाव में शुभेंदु अधिकारी से मुकाबला हारना भी उनके चमकदार राजनीतिक करियर पर बड़े धब्बे के रूप में देखा जाएगा। पांच साल पहले नंदीग्राम में अधिकारी से मुकाबला हारीं 'दीदी' को इस बार उस भवानीपुर में हार का मुंह देखना पड़ा है, जो कभी उनका गढ़ था। टीएमसी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, धार्मिक ध्रुवीकरण और भाजपा कार्यकर्ताओं के लगातार परिश्रम ने टीएमसी को महज 80 सीटों तक समेट दिया तो भगवा दल ने 200 पार जाकर सबको चौंका दिया। खुद ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव बेहद कठिन रहा और अंजाम वही हुआ जिसका अंदाजा संभवत: उनको मतदान के दिन तक हो चुका था। यही वजह है कि मतदान के दिन जब ममता बनर्जी को भवानीपुर में एक बूथ से दूसरे बूथ तक दौड़ते...