वाराणसी, अप्रैल 8 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। संत रविदास ने अपने समय में पोथी संस्कृति की जगह मानुष संस्कृति को बढ़ावा दिया जो उनकी सामाजिकता को आधुनिक आयाम देता है। वे स्वभाव से साधु थे और संस्कार से स्वाभिमानी कवि। अपने अनेक पदों में उन्होंने मानवीय समस्याओं का अति मानवीय हल खोजने की जगह उनका नितांत लोक ग्राह्य और सहज समाधान सुझाया है।इन परिदृश्यों को वरिष्ठ साहित्यकार प्रो.श्रीप्रकाश शुक्ल ने 'भक्ति का लोकवृत्त और रविदास की कविताई' कृति में विस्तार से शब्दांकित किया है। संकटमोचन संगीत समारोह के साहित्य-कला मंच पर इस पुस्तक की परिचर्चा की पूर्व संध्या पर आप के अपने अखबार 'हिन्दुस्तान' से खास बातचीत में प्रो.शुक्ल ने अपनी कृति पर खुलकर बातचीत की। वह कहते हैं रविदास अपने समय, समाज और संस्कृति को संपूर्ण गहराई में समझ रहे थे। यही कारण है ...
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