उरई, मार्च 7 -- जालौन। पाक माह रमजान का 10 दिन का पहला अशरा पूरा होने के बाद अब दूसरा अशरा चल रहा है। यह अशरा 20वें दिन तक चलेगा। इस दौरान नगर की मस्जिदों में इबादत का सिलसिला लगातार जारी है। रोजेदार पूरी अकीदत के साथ रोजे रख रहे हैं और अल्लाह की इबादत के साथ ही दुआएं भी कर रहे हैं। मौलाना सुल्तान अहमद ने बताया कि रमजान माह में रोजा रखना हर बालिग मुसलमान पर फर्ज है। रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि बुरी बातों और गलत कार्यों से खुद को बचाने का अभ्यास भी है। रोजा इंसान को सब्र, जरूरतमंदों के प्रति हमदर्दी सिखाता है। जब व्यक्ति दिनभर भूखा-प्यासा रहता है तो उसे गरीबों की तकलीफ का एहसास होता है। रमजान के दौरान जकात और सदका देने की परंपरा से समाज में समानता और सहयोग की भावना को मजबूत होती है। दावत ए इस्लामी के बुंदलेखंड निगरां सैयद...
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