बेगुसराय, मार्च 18 -- खोदावंदपुर, निज प्रतिनिधि। पाक माह रमज़ानुलमुबारक का पूरा महीना ही मोमिनों के लिए अज़मत, रहमत और बरकतों का महीना होता है। यह मुबारक माह अब हम से विदाई की ओर है। रहमतों, बरकतों व मगफेरत के बाद जहन्नुम की आग से पनाह मांगने वाला वाला अंतिम अशरा भी अब विदाई की ओर है। रमज़ानुलमुबारक की बरकतों से फैजयाब व गुनाहों से माफी पाने के लिए इस अशरे में खुशू व खोजू तथा एखलास के साथ खुदा की इबादत करें। ये बातें जामा मस्जिद नुरूल्लाहपुर के पूर्व इमाम मौलाना मोहम्मद मोईनुद्दीन साहब ने 28वें रमज़ानुलमुबारक के मौके पर बुधवार को कहीं। उन्होंने कहा कि रमज़ान का रोज़ा रोज़ेदार की रूह को पाकीजगी अता करता है। जब इंसान रोजा की हालत में अपने नफ्स को काबू में कर खुदा के अहकाम के ताबे हो जाता है, तब वह इस सरजमीं का सबसे अफज़लतरीन मखलूक बन जाता ह...