मुरादाबाद, फरवरी 28 -- रमजान माह के नवें रोजे की इफ्तार के बाद देर रात दसवें रोजे की सहरी के साथ रमजान माह के पहले अशरा रहमत की विदाई हो गई। रविवार रात रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी शुरू हो जाएगा। तहसील इमाम कारी अब्दुल मुईद ने बताया कि कुरआने-पाक के पहले पारे अल़िफ-लाम-मीम की सूरह अल बकरह की आयत नंबर तिरालीस में अल्लाह का इरशाद है और नमाज कायम रखो और जकात दो और रुकूअ करने वालों के साथ रुकूअ (दोनों हाथ घुटनों पर रखकर, सिर झुकाए हुए अल्लाह की बढ़ाई) करो। रोजा पाकीजगी का परचम और इंसानियत का हमदम है, इसलिए इंसानियत भी। रूहानियत की ता़कत है रोजा, रोजे की ताकत है जकात। इस्लाम में रमजान को पाक मुकद्दस महीना माना जाता है। तहसील इमाम कारी अब्दुल मुईद ने बताया कि रमजान में रोजा रखने से अल्लाह रोजेदार की हर मुराद पूरी करते हैं। मा...