बलरामपुर, मार्च 8 -- गैड़ास बुजुर्ग, संवाददाता। रमजान माह के पवित्र अवसर पर समाजसेवी व पूर्व प्रधान मोहम्मद असलम बब्बू ने कहा कि रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह इबादत, इंसानियत और गरीबों के प्रति हमदर्दी का पैगाम देता है। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना मुसलमानों के लिए बेहद अहम होता है और इस दौरान ज्यादा से ज्यादा इबादत के साथ जरूरतमंदों की मदद करना भी जरूरी है। असलम बब्बू ने बताया कि रमजान के 18 रोजे बीत चुके हैं। ऐसे में हैसियत रखने वाले मुसलमानों को चाहिए कि वे समय रहते जकात और सदका-ए-फित्र अदा कर दें, ताकि गरीब, बेवा, यतीम और मिस्कीन लोगों की ईद भी खुशहाल बन सके। उन्होंने कहा कि ईद की नमाज से पहले अनाज या पैसे के रूप में फितरा निकाल देना चाहिए, जिससे जरूरतमंद लोग भी खुशी के साथ ईद मना सकें। उन्होंने हजरत मुहम्मद सा...