बलरामपुर, मार्च 1 -- गैड़ास बुजुर्ग, संवाददाता। रमजान के पाक महीने में रोजा, नमाज और कुरआन की तिलावत के साथ जकात और फितरा अदा करने का भी विशेष महत्व है। जियाउल इस्लाम अहले सुन्नत के हाफिज अब्दुल दैयान ने बताया कि जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है और हर हैसियत रखने वाले मुसलमान पर यह फर्ज है। सालभर की बचत का 2.5 प्रतिशत हिस्सा जरूरतमंदों को देना जकात कहलाता है। अधिकांश लोग रमजान में अपनी आय का ऑकलन कर जकात अदा करते हैं। हाफिज ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के पास जेवरात या अन्य संपत्ति है तो उसकी कीमत के आधार पर भी 2.5 प्रतिशत जकात देना आवश्यक है। परिवार में जो भी सदस्य कमाई करते हैं, उन सभी पर अलग-अलग जकात देना अनिवार्य माना गया है। रमजान में सदक-ए-फित्र यानी फितरा भी वाजिब है, जिसे ईद की नमाज से पहले अदा करना जरूरी होता है। यह गरीब,...