चंदौली, मार्च 7 -- चंदौली, संवाददाता। मुकद्दस रमजान माह के आखिरी अशरे में लोगों को मस्जिदों में जाकर एतकाफ करना चाहिए। शहर और गांव की मस्जिदों में एतकाफ न हो तो इन जगहों के मुहल्ले वाले गुनहगार होंगे, क्योंकि यह सुन्नत मुअक्कदा है। यह बातें मुफ्ती रिजवान साहब ने कही।उन्होंने कहा कि इस आखिरी अशरे में ही शब-ए-कद्र की रात है। यह हजार रातों से अफजल है। इसे 21, 23, 25, 27 और 29 रमजान की रात में तलाशने का हुक्म है। इस रात की कुछ खास निशानियां भी बतायी गई है। इस रात में रोजेदारों को गुनाहों से तौबा कर अल्लाह की इबादत, जिक्र, दुआ और कुरआन की तिलावत में लगे रहना चाहिए। साथ ही अपने और अपने बुजुर्गों के गुनाहों की माफी भी मांगनी चाहिए।कहा कि 20वें रमजान के बाद तीसरा और आखिरी अशरा जहन्नुम से खलासी का शुरू हो जाएगा। इस अशरे में लोग ईद की तैयारियों में...
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