गाज़ियाबाद, फरवरी 19 -- ट्रांस हिंडन। रमजान का पवित्र महीना इबादत, सब्र और आत्मसंयम का संदेश देता है। इसको लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बार गुरुवार को नन्हे रोजेदारों ने भी अपने पहले रोजे रखकर मिसाल पेश की। पांच से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ अपना पहला रोजा रखा। कम उम्र के बावजूद उनके चेहरे पर थकान से ज्यादा संतोष और खुशी नजर आई। परिवारों ने भी बच्चों के इस हौसले को सराहा और उन्हें प्रोत्साहित किया। माह-ए-रमजान का पहला रोजा गुरुवार को लोगों ने रखा। इस दौरान लोगों ने अल्लाह की इबादत, कुरान, सिफारा, तस्बी व अन्य धार्मिक किताबे पढ़ कर की। रोजा रखना 10 साल की उम्र वाले बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पर फर्ज होता। 10 साल से अधिक उम्र वालों को रोजा रखना अनिवार्य है। लेकिन अल्लाह की इबादत के लिए ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.