औरैया, मार्च 5 -- फफूंद, संवाददाता। पवित्र माह रमजानुल मुबारक का दूसरा अशरा यानि चरण इन दिनों चल रहा है। गुरुवार को रमजान का 16वां रोजा रखा गया। इस्लामिक मान्यता के अनुसार रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत यानि माफी का माना जाता है, जिसमें अल्लाह तआला अपने बंदों के गुनाहों को माफ फरमाता है। औरैया शहर की जामा मस्जिद शाहजमाल के पेश इमाम मौलाना अल्तमश चिश्ती ने रमजान के दूसरे अशरे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रोजा अल्लाह की खास इबादत है, जिसमें दुनिया और आखिरत दोनों की भलाई छिपी हुई है। उन्होंने कहा कि रोजा इंसान के चरित्र निर्माण के साथ उसके अंदर धैर्य, अनुशासन, सहनशीलता और आत्मसंयम जैसे गुण विकसित करता है। मौलाना ने कहा कि आज के समय में व्यक्तित्व विकास और योग्यता बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्थानों में प्रशिक्षण और व्याख्यान आयोजित किए जाते ...
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