गाजीपुर, मार्च 9 -- दिलदारनगर। रमजान का मुकद्दस महीना मुसलमानों के लिए आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पवित्र माह में मुसलमान रोजा रखते हैं, कुरआन मजीद की तिलावत करते हैं और तरावीह की नमाज अदा करते हैं। असगरी बेगम ने बताया कि रमजान का वास्तविक उद्देश्य गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना, उनके दुःख-दर्द को बांटना और नेक काम करना है। यही रोजे का सार और अल्लाह के प्रति समर्पण का प्रमाण है। रमजान में मुसलमानों में नमाज पढ़ने, रोजा रखने और अच्छे काम करने की प्रवृत्ति स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होती है। अल्लाह तआला ने फरमाया है कि जो व्यक्ति दूसरों को नमाज पढ़ने की दावत देता है, उसे सबसे अधिक सवाब मिलता है, जबकि स्वयं नमाज न पढ़ने वाला और दूसरों को दावत देने वाला गुनहगार माना जाता है। रमजान का महीना सब्र का होता है ...