जौनपुर, मार्च 11 -- गौराबादशाहपुर। रमजान महीने का दूसरा अशरा मंगलवार के रोजे के साथ पूरा हो गया। तीसरा और आखिरी अशरा 21वें रोजा बुधवार से शुरू होगा। इस आखिरी अशरे में एक रात शब-ए-कद्र कही जाती है। इस एक रात में इबादत करने का सवाब एक हजार महीनों से भी बढ़ कर मिलता है। यह बातें हाफिज मोहम्मद अशहद ने बताते हुए कहा कि यह रात हजार महीनों से बेहतर है। इस रात की इबादत इंसानों को गुनाहों से पाक कर देती है। शब-ए-कद्र की रात को तीसरे अशरे में तलाश करने के लिए कहा गया है। इसके लिए इक्कीस, तेइस, पचीस, सत्ताइस और उन्तीस पांच रातें हैं। हालांकि अधिकांश इस्लामी विद्वान सत्ताइस की रात ही शब-ए-कद्र मानते हैं।

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