गोपालगंज, मार्च 5 -- कुचायकोट। एक संवाददाता रमजानुल मुबारक का मुकद्दस महीना रहमत, बरकत और नजात का पैगाम लेकर आता है। इसी क्रम में गुरुवार को रमजान का दूसरा अशरा, जिसे अशरा-ए-मगफिरत कहा जाता है, समाप्त हो गया। इस अवसर पर नमाज के बाद सिसवां स्थित मस्जिद में मौलाना इफ्तेखार अहमद, मौलाना असदुल्लाह तथा शिक्षक हाफिज इस्माइल ने रोज़ेदारों को गुनाहों से तौबा करने और इबादत में मन लगाने की नसीहत दी। मौलाना इफ्तेखार अहमद ने कहा कि रमजान का महीना इंसान की इस्लाह और तजकिया-ए-नफ्स का महीना है। उन्होंने बताया कि पूरे साल इंसान से जो भी गुनाह हो जाते हैं, यह महीना अल्लाह से सच्चे दिल से माफी मांगने का सबसे बेहतर मौका देता है। उन्होंने रोजे की फजीलत बताते हुए कहा कि अल्लाह तआला ने रोजेदारों का दर्जा बहुत बुलंद रखा है। हदीस के अनुसार जन्नत में रोजेदारों के...