औरैया, मार्च 16 -- फफूंद, संवाददाता। पवित्र रमजान का महीना मुसलमानों के लिए रहमत, बरकत और मग़फिरत का महीना माना जाता है। इस महीने में रोज़ा रखने के साथ इबादत, दुआ, कुरआन की तिलावत और जरूरतमंदों की मदद पर विशेष जोर दिया जाता है। इस मुकद्दस महीने का मकसद इंसान के अंदर सब्र, परहेजगारी और अल्लाह का डर यानी तकवा पैदा करना है। नगर के इस्लामिक विद्वान सैयद चिश्ती मियां ने बताया कि रमजान इंसान को अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने और बुराइयों से दूर रहने की सीख देता है। उनके अनुसार रोज़ा केवल खाना-पीना छोड़ देने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने दिल, जुबान और व्यवहार को भी बुराइयों से बचाने की शिक्षा देता है। रोजेदार दिनभर भूख और प्यास सहते हुए सब्र रखता है और गुस्से व बुरी आदतों पर काबू पाने की कोशिश करता है। उन्होंने बताया कि कुरआन शरीफ में भी रोज़े का उद्दे...