मऊ, मार्च 1 -- मऊ, संवाददाता। माह-ए-रमजान का रोजा महज एक धार्मिक फर्ज नहीं बल्कि इंसानियत, सब्र एवं सेहत का संदेश भी देता है। इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने रमजान में रखे जाने वाले रोजे इंसान को भूख-प्यास के जरिए आत्म संयम व संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाते हैं। 13 घंटे भूखे रहने से कई बिमारियों से छुटकारा मिलता है। माह-ए-रमजान बेहतर स्वास्थ्य, सब्र व अनुशासन की सीख देता है। सामाजिक बुराइयों से रोकता है। मानवता की भावना को विकसित करता है। शाही कटरा के मौलाना इफ़्तिख़ार अहमद ने कहा कि इस्लाम धर्म में हर कार्य मानवता का संदेश देता है। दुनिया में बहुत से धनवानों को भूख एवं प्यास के दर्द का एहसास नहीं होता है। मगर रमाजान में रोजा रखने से भूख और प्यास का एसास होता है। रमजान में अमीर एवं गरीब दोनों को भूख और प्यास की तकलीफ से गुजरना पड़ता है। बताया कि रो...
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