औरैया, फरवरी 28 -- फफूंद, संवाददाता। पवित्र रमज़ान माह को इस्लाम में रहमत, बरकत और मग़फिरत का महीना माना गया है। नगर में इन दिनों इबादत, तिलावत और दुआओं का विशेष माहौल है। सहरी से इफ्तार तक रोज़ेदार सब्र और शुक्र के साथ रोज़ा रख रहे हैं, वहीं रातों को मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ अदा की जा रही है। औरैया शहर स्थित जामा मस्जिद शाह जमाल के पेश इमाम मौलाना अल्तमश चिश्ती ने रमज़ान की फज़ीलत बयान करते हुए कहा कि यह वही महीना है जिसमें अल्लाह ने कुरआन शरीफ को नाज़िल फरमाया। उन्होंने कुरआन की आयत का हवाला देते हुए बताया कि 'ऐ ईमान वालों! तुम पर रोज़े फर्ज़ किए गए, जैसे तुमसे पहले लोगों पर फर्ज़ किए गए थे, ताकि तुम तक़वा हासिल करो।' (सूरह अल-बक़रह 2:183)। उन्होंने कहा कि रोज़ा केवल भूख-प्यास का नाम नहीं, बल्कि आत्मसंयम, परहेज़गारी और अल्लाह की आज्ञाक...
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