औरैया, फरवरी 27 -- फफूंद। मुकद्दस माह रमज़ान रहमत, बरकत और मग़फिरत का महीना माना जाता है। इसी पवित्र महीने में मुसलमान जकात और फितरा अदा कर जरूरतमंदों की मदद करते हैं। मस्जिदों में नमाज के बाद इन दिनों जकात और फितरा की अहमियत पर विशेष रूप से जानकारी दी जा रही है। स्थानीय मौलाना खलील उल्लाह ने बताया कि इस्लाम में जकात को बुनियादी इबादतों में शामिल किया गया है। जिन लोगों के पास साल भर में निसाब से अधिक धन-संपत्ति होती है, उन पर उसकी ढाई प्रतिशत रकम जरूरतमंदों को देना फर्ज है। जकात का अर्थ 'पाक करना' और 'बढ़ाना' है। यानी अल्लाह की राह में खर्च किया गया माल घटता नहीं, बल्कि उसमें बरकत होती है। उन्होंने कहा कि जकात का उद्देश्य समाज में आर्थिक संतुलन बनाए रखना है, ताकि अमीर और गरीब के बीच की खाई कम हो सके। जकात के माध्यम से गरीब परिवारों की बुनिय...
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